वाराणसी, जुलाई 6 -- Varanasi News: वाराणसी। शहीदाने कर्बला की याद रविवार को एक बार फिर गमजदा कर गई। आंखें डबडबा गईं तो दिल में हूक सी उठी। लगा जैसे कलेजा मुंह को आ जाएगा। खिराजे अकीदत पेश करने वाले हर शख्स के कदम बोझिल से रहे। खुदा की राह में कुर्बान होने वालों की कहानी अपनी सी लगने लगी। मानो कोई अपना ही चला गया। मौका था सरैयां स्थित सदर इमामाबाड़ा में 72 ताबूतों के जुलूस का। जैसे ही 72 ताबूत उठाए गए, दिल में दबी 'या हुसैन' की सदा लफ्जों के सहारे मुंह की डेहरी पार कर गूंज उठी। अजादारों ने पुरनम आंखों से कर्बला के शहीदों को खिराजे-अकीदत पेश की। ताबूत को देख हर कोई जार-जार रो पड़ा। अंजुमन आबिदिया (चौहट्टा लाल खान) और अंजुमन-हा-ए-मातमी बनारस के नेतृत्व में जुलूस निकला। बड़ी तादाद में अजादाराने-हुसैनी और मोमिनीन ने इमाम हुसैन और कर्बला के शही...