वाराणसी, अक्टूबर 13 -- नामवर सिंह की आलोचना पर विचार Varanasi News: वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। वरिष्ठ आलोचक डॉ. गया सिंह ने कहा कि नामवर सिंह का आलोचनात्मक विवेक मिट्टी, गिट्टी और लिट्टी के संग विकसित हुआ। यानी उनकी आलोचना का आधार जीवन के वास्तविक अनुभव और जमीन से जुड़ी संवेदना थी। उनका विवेक इतना गहरा था कि वह किसी भी कहानी, उपन्यास या कविता के सृजित पात्रों को स्वयं जीते हुए आलोचना के मर्म तक पहुंच कर उसे जन-जन के लिए सुलभ बना देते थे। डॉ. गया सिंह सोमवार को यूपी कॉलेज के हिंदी विभाग में प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर आयोजित 'डॉ. नामवर सिंह : हिंदी आलोचना का संवादी स्वर' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन एक सत्र में बोल रहे थे। इसके पूर्व उद्धाटन सत्र में प्रसिद्ध कवि मदन कश्यप ने कहा कि नामवर सिंह पहले आलोचक थ...