वाराणसी, अगस्त 13 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नये जमाने में मनोरंजनों के साधनों के असीमित विस्तार ने पारंपरिक खेलों पर ग्रहण सा लगा दिया है। काशी का ऐसा ही एक पारंपरिक खेल महुअर है तेजी से इतिहास का हिस्सा बनता जा रहा है। यह भी पढ़ें- Kanpur News: घट रहा कुश्तियों का आकर्षण,जिम बने युवाओं की पसंदमहुअर का आयोजन सावन में नागपंचमी के दिन काशी में इस खेल विशेष का मोहल्ले-मोहल्ले आयोजन होता था। इस खेल के नामी खिलाड़ियों में शुमार पंजेलाल शानदार अतीत को याद करते हुए रोमांचित हो उठते हैं। बताया, एक दौर था जब नागपंचमी को शहर के दर्जनों स्थानों पर महुअर का खेल होता था। यह खेल खेलने के लिए बड़ी संख्या में संपेरे काशी में आया करते थे। यह भी पढ़ें- Shamli News: हरियाली तीज: अब न वो झूले रहे, और ना वो लोकगीतमहुअर के करतब उन्होंने कहा क...