वाराणसी, जुलाई 31 -- Varanasi News: वाराणसी। भैयाजी बनारसी न केवल साहित्यसेवी थे अपितु साहित्यिक पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे। उनके लेखन का दायरा बच्चों से लेकर प्रौढ़ों तक रहा। उन्होंने नई पीढ़ी के साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया। ये बातें नगर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दयानंद ने कहीं। वह साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास की संयुक्त आयोजन में हिंदी की धरोहर काशी की सृजन परंपरा के अंतर्गत आयोजित व्याख्यानमाला में बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे। अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय के सभागार में गुरुवार को हुए आयोजन में डॉ. दयानंद ने कहा कि भैयाजी बनारसी को काशी का पहला साहित्यिक संपादक होने का गौरव प्राप्त है। वह बनारसीपन के भी पक्के हिमायती थे। रईस होते हुए भी उनका जीवन सादगीपूर्ण था। वहीं कुशवाहा कांत अपने दौर के विलक्षण साहित्यकार थे। मात्र 34 वर्...