वाराणसी, सितम्बर 18 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बाबू आनंद बहादुर सिंह जैसा व्यक्तित्व दुर्लभ होता है। एक लेखक के रूप में उन्होंने कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। ये बातें पद्मश्री पं.शिवनाथ मिश्र ने कहीं। वह संपादकाचार्य डॉ.आंनद बहादुर सिंह की 97वीं जयंती पर गुरुवार को उनके भदैनी स्थित आवास पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि वे संकटमोचनजी के नेमी भक्त थे। साहित्य, संगीत, रंगमंच जैसी विधाओं की गहराई से जानकरी रखना उनके स्वभाव में था। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं भारतेंदु संस्थान के अध्यक्ष डॉ. गया सिंह ने कहा कि वह बनारस को जीने वाले व्यक्ति थे। उनकी लेखनी में संतमत की छाप दिखती थी। यह भी पढ़ें- आज हिन्दी फिर नई चाल में ढल रही हैः डा. गया सिंह विशिष्ट अतिथि साहित्यकार यशपाल कुमार ने कहा ...