वाराणसी, नवम्बर 5 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। प्रारब्ध तो सबको भोगना ही पड़ता है। यहां तक कि तत्वज्ञानियों को भी। तत्वज्ञानियों में यह समर्थ होता है कि वह संचित कर्म को नष्ट कर देते हैं किंतु प्रारब्ध को वे भी नष्ट नहीं कर सकते। ये बातें पुरी पीठाधीश्वर जगद़गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहीं। वह अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति मठ में गुरुवार को मंगल दर्शन सत्र में आस्थावानों की जिज्ञासाएं शांत कर रहे थे। शंकराचार्य महाराज ने कहा कि पूर्व जन्मों में किए गए शुभाशुभ कर्मों के फल संचित कर्म कहलाते हैं। उन संचित कर्मों में से भगवान के अनुग्रह से जो कर्म फल देना शुरू कर देते हैं उन्हें प्रारब्ध कहते हैं। एक भक्त के यह पूछने पर कि जब सारे कर्म ईश्वर की करवाता है तो वे अच्छे और बुरे कैसे हो सकते हैं। इस पर महाराजश्री ने क...