वाराणसी, अगस्त 24 -- Varanasi News: वाराणसी। सत्य प्रदर्शन की चीज नहीं है। इसे स्वीकार करना चाहिए। पुरुषार्थ के लिए विवेक का होना आवश्यक है। ये बातें अखिलदास महाराज ने कहीं। वह बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर में संगीतमय रामकथा में रविवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ के कई भेद होते हैं। जैसे दिव्य पुरुषार्थ और परम पुरुषार्थ। ईश्वर प्राप्ति के लिए किया जाने वाला पुरुषार्थ दिव्य पुरुषार्थ कहलाता है। एक बार क्रोध करने से एक महीने का जप तप नष्ट हो जाता है। साधकों को सुगंधित इत्र नहीं लगना चाहिए। यह भी पढ़ें- Rampur News: दूसरों की भलाई ही सच्चा धर्म: पंडित पवन कौशिक

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