वाराणसी, अक्टूबर 16 -- Varanasi News: वाराणसी। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र के शोध संवाद समूह की तरफ से गुरुवार को नई सदी की हिन्दी कहानी विषय पर संवाद हुआ। संयोजन केंद्र समन्वयक प्रो. प्रभाकर सिंह और अध्यक्षता प्रो. नीरज खरे ने की। अतिथि वक्तव्य में रश्मि रावत ने बतकही की सार्थकता पर चर्चा करते हुए कहा कि आलोचना एक परंपरा है, जो सतत है। आलोचना एक जज नहीं, वकील है जो बहस शुरू करती है। अध्यक्षीय वक्तव्य में नीरज खरे ने दुलाईवाली, एक टोकरी भर मिट्टी जैसी कहानियों से लेकर नई सदी तक की कहानियों की पृष्ठभूमि की चर्चा की। अंत में प्रो. प्रभाकर सिंह ने अतिथि वक्ताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। संचालन प्रियंका सोनकर ने किया।

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