वाराणसी, जुलाई 28 -- Varanasi News: वाराणसी। कथा लेखिका नीरजा माधव ने कहा धूमिल एक प्रतिष्ठित कवि थे। उनकी कविता में प्रतिरोध के मुख्य स्वर थे। उनकी मूर्ति तोड़ना अत्यंत निंदनीय कृत्य है। प्रशासन को चाहिए कि उनकी मूर्ति को उसी स्थान पर पुनः स्थापित कराए। वह खेवली में कवि धूमिल की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय के आवास पर काशी के प्रतिनिधि साहित्यकारों की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। प्रख्यात नवगीतकार, समीक्षक प्रो. इन्दीवर ने कहा कि धूमिल एक जनवादी कवि थे। उनकी कविताओं में आम जनता का दर्द और आक्रोश था। उनकी मूर्ति तोड़ना आम जनता की संवेदना पर कुठाराघात करना है। यह भी पढ़ें- मैं याद आता रहूँगा सदा क़लम के लिए... वरिष्ठ नवगीतकार ओम धीरज ने कहा कि धूमिल के गीत कविता से ही निकले हुए एक कवि थे इसलिए उनकी बात उन ...