Varanasi News: धर्म आवश्यकता से अधिक संचय नहीं सिखाता
वाराणसी, सितम्बर 25 -- Varanasi News: वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ (भेलूपुर) में गुरुवार को दशलक्षण महापर्व उत्तम आर्किंचन्य धर्म के नौवें दिन मांगलिक क्रियाएं की गईं। मुनि धर्म सागर एवं मुनि भाव सागर के सानिध्य में दशलक्षण विधान किया गया। मुनि भाव सागर ने कहा कि अपनी आवश्यकताओं से अधिक संचय न करना सादगी से रहना, यही धर्म सिखाता है। आत्मा के अलावा अपना कुछ नहीं है। मुनि धर्म सागर ने कहा कि वस्तु के प्रति लगाव के कारण दुख होता है। त्याग के बाद ममतत्व भाव नहीं होना चाहिए। ममत्व भाव जब तक रहेगा, आकिंचन्य धर्म नहीं आएगा। जब तक संसार की किसी भी वस्तु से हमारा संबंधित है तब तक बंधन है। यह भी पढ़ें- शिविरार्थियों को साधना संग सिखाए जा रहे संस्कार इसके पास भीतर बाहर दोनों जगह कुछ भी नहीं है।जैन समाज के वरिष्ठ उपाध्य...
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