वाराणसी, अगस्त 12 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। जो गुरु से छल करते हैं, वे कभी सुखी नहीं रहते। जब उन्हें गुरु से प्राप्त विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, उसी समय वह साथ छोड़ देती है। संगीत तो वैसे भी चंचला है। जरा सी पकड़ ढीली हुई नहीं कि गई हाथ से।यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुक्ता का। वह सुबह-ए-बनारस के आनंद कानन कला गुरुकुल की ओर से मंगलवार को नगवा के रविदास पार्क में आयोजित 'काशी कथा' के सत्र में अपनी कहानी का पाठ कर रही थीं। उनकी कहानी 'सुरों के द्वीप' बनारस घराना के एक ख्यात तबला वादक के जीवन से जुड़ी सच्ची घटना पर आधारित है। इस कहानी में एक कलाकार की साधना के साथ उनके शिष्यों की नाफरमानी का भी विस्तार से जिक्र है। गुरु की याद में होने वाले संगीत समारोह में तबला बजाने के लिए भी फीस मांगने वाले एक कलाकार को किस...