वाराणसी, अक्टूबर 12 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गुरु के प्रति समर्पण ही शिष्य को ज्ञान का अधिकारी बनता है। यही भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल प्रकृति है। अर्जुन ने जब समर्पित भाव से श्रीकृष्ण से कहा कि मैं आपका शिष्य हूं। मुझे समझाइए तब गीता जैसा ज्ञान पुंज हमारे समक्ष उपस्थित हुआ। उक्त विचार प्रो. विजयशंकर शुक्ल ने बीएचयू के मालवीय भवन में रविवासरीय गीता प्रवचन में व्यक्त किए। प्रो. शुक्ल ने कहा कि भगवान सदैव धर्म की रक्षा के लिए, सज्जनों की परित्राण के लिए कृत संकल्प हैं। आरंभ में अतिथियों का स्वागत गीता समिति के सचिव प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने किया। गीता के चतुर्थ अध्याय का पारायण सत्यनारायण पांडेय, भजन की प्रस्तुति संगीत एवं मंच कला संकाय के छात्रों और धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव प्रो. शरदिंदु कुमार त्रिपाठी ने किया। ...