वाराणसी, अगस्त 25 -- Varanasi News: वाराणसी। काशी का भौगोलिक स्वरूप समय के साथ-साथ थोड़ा बहुत भले ही परिवर्तित हुआ हो, परंतु उसका आध्यात्मिक स्वरूप हमेशा अक्षुण्ण रहा है। ओंकार स्वरूप काशी का एक छोर संकट मोचन तक जाता है तो दूसरा छोर सारनाथ है। सारनाथ का दूसरा नाम ऋषि पत्तन है। अर्थात यहां ऋषियों का समागम लगातार होता रहता था। सारंग ऋषि के नाम पर यहां सारंग नाथ का पौराणिक मंदिर है। इसके बारे में मान्यता है कि पूरे सावन भर भगवान शिव और मां गौरी सारनाथ में निवास करते हैं। सार का अर्थ ही है तत्व या जीव, जगत जगदीश का रहस्य। उस तत्व की अनुभूति कराने वाला यह सारंगनाथ क्षेत्र है। शिव यानी एक ऐसी आश्वस्ति जिसकी शरण में आ जाने के बाद काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। एक तरफ मां अन्नपूर्णा का सजा राग दरबार तो दूसरी ओर महाश्मशानवासी शिव का विराग। यह भी पढ़...