वाराणसी, जुलाई 25 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गोष्ठियों का औचित्य तभी है जब उसमें पढ़ी जाने वाली कविताओं पर भी चर्चा हो। यदि ऐसा नहीं हुआ तो गोष्ठी निरर्थक मानी जाएगी। अलंकार साहित्य ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये बातें पूर्व जिला जज डॉ. चंद्रभाल सुकुमार ने कहीं। वह शनिवार को अलंकार साहित्य की चितईपुर में आयोजित मासिक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उनका एक शेर दिल्ली के छात्र आंदोलन को समर्पित रहा- 'हर तरफ बिखेर पड़े तिनके, आंधियों से हैं लड़े तिनके, आग जंगल में लगी खुद ही, बंट गए छोटे-बड़े तिनके...।' इसके बाद उदीयमान रचनाकार अनु मिश्रा ने चंद्रशेखर आजाद पर केंद्रित अपनी रचना के पाठ से राष्ट्रभक्ति का प्रमाण दिया।

रचनाकारों की प्रस्तुति परमहंस तिवारी 'परम' ने अपनी गजल में आम आदमी की हसरतों का लेखाजोखा...