नई दिल्ली, जून 7 -- कहते हैं कि झूठ की बुनियाद पर खड़ा किया गया महल चाहे कितना भी आलीशान क्यों न हो, एक न एक दिन वह ढह ही जाता है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के दम पर न सिर्फ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी प्रतिष्ठित संस्था को चकमा दे दिया, बल्कि 25 साल तक केंद्र में एक राजपत्रित (गजेटेड) अधिकारी के रूप में नौकरी भी करता रहा। अब वही सर्टिफिकेट उसकी दोषसिद्धि का सबसे बड़ा आधार बन गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक गोयल की अदालत ने अपने 198 पन्नों के फैसले में आरोपी गौरव मलिक को दोषी करार दिया है। मामले की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी। उस दौरान संघ लोक सेवा आयोग ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) में 'प्रशिक्षण अधि...