प्रमुख संवाददाता, सितम्बर 17 -- 'क्यूआर कोड दिखाइए और भुगतान पाइए' की आदत डाल चुके कानपुर के लोगों के बीच अब फिर कैश की चर्चा होने लगी है। यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी शुल्क लगने की आशंका से कारोबारियों में बेचैनी बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि छोटे डिजिटल भुगतान पर भी शुल्क लगा तो रोज के कारोबार की लागत बढ़ जाएगी। यही वजह है कि कई कारोबारी ग्राहकों से नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे हैं। इससे बाजार में डिजिटल भुगतान के साथ नकदी की मांग भी बढ़ने लगी है। कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने लेनदेन को बेहद आसान बनाया है। ग्राहक 20-50 रुपये की खरीदारी से लेकर हजारों रुपये के भुगतान तक मोबाइल से कर देते हैं। दुकानदारों ने भी खुले पैसे रखने और छुट्टे की समस्या से राहत महसूस की है। अब शुल्क की चर्...