सुपौल, अक्टूबर 12 -- रामकथा में मोह के पांच स्वरूप Supaul News: पिपरा, एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र के लिटियाही स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के प्रांगण में आयोजित 9 दिवसीय संगीतमय रामकथा के दूसरे दिन सोमवार को अयोध्या से आई कथावाचक मानस बिंदु साध्वी ने श्री राम चरित मानस में पांच मोह का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मोह का अर्थ है भगवान में संशय करना, भगवान के अस्तित्व को न समझना। दूसरा भाव है मन में अभिमान आना। जब किसी प्राणी में अपनी बुद्धि का अहंकार आ जाता है, तब उसे मोह हो जाता है और वो भगवान को झूठा समझने लगता है। इसी तरह मां सती को अपनी बुद्धि पर अहंकार हो गया था। अहंकार ऐसा दुर्गुण है, जो बड़े-छोटे का सम्मान करना भी भुला देता है। अहंकारी लोग किसी का सम्मान नहीं करते। कथा प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि रामायण के अनुसार भगवान शिव ...