नई दिल्ली, जुलाई 12 -- सफलता किसी की परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती है। जो लोग अपने लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत, धैर्य और लगन से काम करते हैं, उन्हें एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है। ठीक, यह बात प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर भी लागू होती है। क्योंकि किसी भी प्रतियोगी सरकारी परीक्षा को पास करना आसान नहीं होता। इसके लिए सालों की मेहनत, अनुशासन और लगातार प्रयास की जरूरत होती है। जो लोग हार नहीं मानते, आखिरकार वही अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। इस सफलता के पीछे परिवार, दोस्तों और मां-बाप का पूरा सहयोग रहता है। ऐसी ही एक कहानी है धर्मेंद्र कुमार की। मां पुलिस थाने में स्टाफ के वर्दियां धोने का काम करती थीं। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका बेटा अधिकारी बनकर उसी थाने में सम्मानित किया जाएगा।राजस्व अधिकारी का पद किया हासिल ज...