नई दिल्ली, जुलाई 11 -- Bhagavad Gita: भगवद गीता सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन जीने की कला सिखाई है। गीता के 18वें अध्याय का 66वां श्लोक पूरे ग्रंथ का सार माना जाता है। यह श्लोक मनुष्य को चिंता, भय और मोह से मुक्ति का सबसे सरल रास्ता बताता है।गीता का 18वें अध्याय का 66वां श्लोक सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ भावार्थ: भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि सभी प्रकार के धर्मों, नियमों और जिम्मेदारियों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा। इसलिए किसी भी बात की चिंता मत करो। यह श्लोक समर्पण का संदेश देता है।'सर्वधर्मान्परित्यज्य' का अर्थ क्या है? इस श्लोक को पढ़कर कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि क्या ...