सिमडेगा, जुलाई 28 -- Simdega News: सिमडेगा, प्रतिनिधि। स्वरोजगार केवल एक शब्द नहीं बल्कि आत्मसम्मान से जीने की वह चाबी है जो किसी व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक दिशा बदल देती है। जिले के जलडेगा से आई प्रेमशे टेलर की कहानी इसी बात का जीवंत प्रमाण है। जो सरकारी तंत्र की नीतियों का भी आदर्श पेश कर रहा है। कभी रोजगार की तलाश में भटकने वाली पाँच महिला एवं युवती रूपाली समद, अगास्टिन देवी, बंटी कुमारी, करूणा कुमारी और माधुरी कुमारी का आज खुद के व्यावसायिक प्रतिष्ठान का मालिक बन जाना केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की एक नई पटकथा है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल इस पूरी कहानी का सबसे खूबसूरत और सीख देने वाला पहलू यह है कि हुनर और पूंजी का तालमेल कैसे कमाल दिखा सकता है। अक्सर देखा गया है कि सरकारी कौशल विकास य...