सिमडेगा, सितम्बर 16 -- Simdega News: सिमडेगा। जिले में करमा पर्व का उल्लास धीरे-धीरे अपने रंग में आने लगा है। सरहुल के बाद प्रमुख प्रकृति पर्वों में शुमार करमा केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि झारखंड की मिट्टी, प्रकृति, लोकगीत और सामुदायिक जीवन से जुड़ी ऐसी परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। वैसे तो करमा पूजा 25 सितंबर को होगी। लेकिन इसकी तैयारी और उत्सव का सिलसिला सात दिन पहले ही शुरू हो जाता है। करमा पर्व की शुरुआत जावा उठाने की परंपरा से हो चुकी है। तीज के पारण के बाद युवतियां समूह में नदी या तालाब पहुंचती हैं। स्नान और पूजा-अर्चना के बाद बांस की नई डलिया में बालू लाया जाता है। इसी बालू में धान, मकई, जौ, चना, गेहूं सहित अलग-अलग सात प्रकार के अनाज के बीज बोए जाते हैं। यही जावा अगले सात दिनों तक आस्था का केंद्र रहता है। जावा केवल बालू और...