नई दिल्ली, जून 8 -- हिंदू धर्म में शंख को पवित्रता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। लगभग हर देवी-देवता की पूजा में शंख बजाया जाता है और उससे जल चढ़ाया जाता है। लेकिन भगवान शिव की पूजा में शंख का उपयोग पूरी तरह वर्जित है। शिव पुराण और स्कंद पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख है कि शिव पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना अशुभ माना गया है। इस नियम के पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा है, जो शिव भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।शंखचूड़ वध की पौराणिक कथा प्राचीन काल में शंखचूड़ नाम का एक बहुत शक्तिशाली असुर था। उसने अपनी तपस्या और वरदान के बल पर तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी और देवताओं को भी परेशान करने लगा था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर शंखचूड़ का वध किया। शिव पुराण के अनुसार, शंखचूड़ के मरने के बाद उसकी हड्डियों ...