नई दिल्ली, अक्टूबर 13 -- कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य के आरक्षण से जुड़े 2022 के कानून के प्रावधानों को खारिज कर दिया है। इस कानून के तहत राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण को 15 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण को 3 से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया गया था। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि आरक्षण में 50 फीसदी की अधिकतम सीमा का उल्लंघन पूरी तरह असंवैधानिक है। हाईकोर्ट में फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस के एस हेमलेखा की पीठ ने कहा कि 'कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीट और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण) अधिनियम, 2022' की धारा-3, कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक ले जाकर संविधान...