नई दिल्ली, जुलाई 28 -- द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ:।श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत:।।श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:।यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत:।। (स्कंद पुराण) -बारह महीनों में श्रावण मास मुझे सबसे अधिक प्रिय है। इसका माहात्म्य सुनने योग्य है। इसके श्रवण मात्र से सिद्धि मिलती है। इस मास की पूर्णिमा को चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में होता है, इसलिए इसका नाम 'श्रावण' पड़ा। इस पवित्र मास के माहात्म्य को सुनने मात्र से मनुष्य को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।क्यों किया जाता है शिव पर जल अर्पित पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। इसमें निकले हलाहल विष को शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता शांत करने के लिए सभी देवताओं...