सहरसा, अक्टूबर 9 -- Saharsa News: सत्तर कटैया, एक संवाददाता। सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग एनएच-327ई से सटे सिहौल गांव में स्थित वनदेवी धाम आस्था और रहस्य का अनूठा संगम है। मान्यता है कि सदियों पहले खंडित हुई प्रतिमा को विसर्जित करने की तैयारी के बीच माता ने ग्रामीणों को स्वप्न में यहीं पूजा करने का आदेश दिया था। तभी से यहां पूजा- अर्चना की परंपरा चली आ रही है। शारदीय नवरात्र में वनदेवी के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार आठवीं शताब्दी में विदेशी आक्रांताओं ने यहां स्थापित प्रतिमाओं को खंडित कर जमीन में दफना दिया था। कालांतर में यह स्थान घने जंगल में तब्दील हो गया। सैकड़ों वर्ष बाद ग्रामीणों ने खेती के लिए जंगल की सफाई और पोखर की खुदाई शुरू की तो यहां खंडित प्रतिमा...