सहरसा, अक्टूबर 15 -- Saharsa News: महिषी एक संवाददाता । प्रखण्ड के महपुरा गांव में कोसी नदी के किनारे बाबाकारू खिरहर का मंदिर अवस्थित है, जहां नवरात्र के महासप्तमी को दूध की धारा बहने लगती है। सनातन इतिहास कहता है कि 17वीं शताब्दी में सहरसा जिले के महपुरा गांव के एक यादव परिवार में कुलदेवी मां दुर्गा के कृपा से एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम उसके माता पिता ने कारू रखा। स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा कारू खिरहर भगवान श्री कृष्ण के वंशज थे, जो मथुरा से बिहार आ गए थे। बालक कारू खिरहर बचपन से ही बड़े बलवान और युद्ध कला में निपुण थे। चारों वेद और पुराणों का उन्हे पूरा ज्ञान था। उन्हें गौ माता और महादेव से अत्यंत प्रेम था। दिन रात बाबा गौ माता की सेवा करने में और महादेव की पूजा अर्चना में उनका जीवन बीतता था। बाबा कारू खिरहर ने कई वर्षों तक नाकुच ...