नई दिल्ली, जून 28 -- बैंक से लोन लेने वाले आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के बीच क्या वाकई अलग-अलग नियम लागू होते हैं? हाल ही में इसी सवाल पर देश की सर्वोच्च अदालत ने ऐसी टिप्पणी की है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अक्सर बैंक बड़े कर्जदारों को हजारों करोड़ रुपये का लोन मंजूर करते समय अपेक्षाकृत ढीला रवैया अपनाते हैं, लेकिन जब कोई आम व्यक्ति छोटा पर्सनल लोन लेने जाता है, तो उससे इतनी शर्तें और दस्तावेज मांगे जाते हैं कि कई बार यह प्रक्रिया परेशान करने वाली बन जाती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बैंकों के नियमों को कमजोर करने की बात नहीं कर रही है, बल्कि प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और निष्पक्ष बनाने की जरूरत पर जोर दे रही है। यह भी पढ़ें- 75% तक रिटर्न! एक...