रांची, अक्टूबर 26 -- Ranchi News: रांची, ​विशेष संवाददाता। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू)​ के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में सोमवार को आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई गई। इसकी शुरुआत शिक्षकों व विद्यार्थियों ने एक श्लोकी रामायण और बालकांड के सामूहिक व सस्वर पाठ से की। ​संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के वह प्रथम प्रकाशपुंज हैं, जिन्होंने मौन प्रकृति को वाणी दी और उस वाणी को उदात्त काव्य में रूपांतरित किया। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जानेवाली यह जयंती सिर्फ एक ऋषि का जन्मदिवस मात्र नहीं है, बल्कि इसे वस्तुतः भारतीय साहित्य के अवतरण दिवस के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कि आधुनिक समय में रामायण नेतृत्व, सुशासन और सामाजि...