उमेश नेपाल, मार्च 24 -- मर्यादा पुरुषोत्तम राम युगों-युगों से हमारी चेतना के आधार रहे हैं। ऐसे राम के आदर्श चरित्र को सबसे पहले आदि कवि महर्षि वाल्मीकि ने ही रामायण के रूप सबके सामने प्रस्तुत किया। राम कथा का मूल वाल्मीकि रामायण को ही माना जाता है। राम में ऐसे क्या गुण थे? उन्होंने अपने जीवन में क्या आदर्श प्रस्तुत किए? यह विवेचना युगों से जारी है. जन-जन के मन भाते राम राम अपने जन्म से ही जन-जन में लोकप्रिय हो गए। उनके पिता दशरथ के राज्य में सच्चरित्रता और समृद्धि ऐसी रही कि उस राज्य का राजा मनुष्य नहीं, देवता लगता है। महाराज द‌शरथ स्वयं जनप्रिय हैं। उन्होंने जिस धर्मबल से राम को प्राप्त किया है, उस धर्म के अनुष्ठान में लगभग प्रजा का हर वर्ग सम्मिलित हुआ। अतः राम केवल दशरथ के नहीं, बल्कि सबके सुकृत के फल हैं। सबके रक्षक प्रजा अपने राजा को...