नई दिल्ली, जुलाई 31 -- आज के समय में लोग हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देना चाहते हैं। सोशल मीडिया से लेकर निजी जीवन तक अपनी बात साबित करने की होड़ लगी रहती है। लेकिन कई बार ज्यादा बोलना रिश्तों में दूरी, मन में तनाव और निर्णयों में जल्दबाजी का कारण बन जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता हमें याद दिलाता है कि मौन अक्सर वह प्रकट कर देता है, जिसे शोर कभी नहीं कर सकता है। इसका मतलब हमेशा चुप रहना नहीं, बल्कि सही समय पर रखा गया मौन कई बार सबसे प्रभावशाली उत्तर बन जाता है।मौन कमजोरी नहीं, आत्मबल की पहचान है बहुत से लोग मानते हैं कि चुप रहना कमजोरी का संकेत है, लेकिन गीता का संदेश इससे बिल्कुल अलग है। जब व्यक्ति बिना क्रोध, अहंकार या आवेश के शांत रह पाता है, तो यह उसके आत्मसंयम को दर्शाता है। हर बात पर प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य रखना मानसिक परिपक्वता क...