नई दिल्ली, जून 13 -- आज 13 जून 2026 की सुबह हमें याद दिलाती है कि सच्ची महानता धन या दिखावे में नहीं, बल्कि मनुष्य के अंदर छिपे गुणों में होती है। चाहे संसाधन कितने भी कम हों, अगर इंसान में धैर्य, स्वच्छता, विवेक और अच्छे संस्कार हैं, तो वह किसी भी स्थिति में सम्मान और सुख पा सकता है। चाणक्य नीति में एक महत्वपूर्ण श्लोक है:दरिद्रता धीरतया विराजते कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।कदन्नता चोष्णतया विराजते कुरूपता शीलतया विराजते।।इस श्लोक का अर्थ चाणक्य कहते हैं कि गरीबी धैर्य से शोभित होती है, सस्ता कपड़ा स्वच्छता से सुंदर लगता है, साधारण भोजन गरमागरम होने पर स्वादिष्ट हो जाता है और कुरूप व्यक्ति भी अच्छे शील-स्वभाव से महान बन जाता है।धैर्य गरीबी को भी शोभा देता है चाणक्य जी कहते हैं कि निर्धनता में भी धैर्य रखने वाला व्यक्ति बहुत कुछ हासिल कर स...