नई दिल्ली, जुलाई 21 -- 21 जुलाई 2026 का सुबह का यह पल हमें याद दिलाता है कि जीवन में धन होना जरूरी है, लेकिन सिर्फ धन से जीवन सुखी नहीं होता। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि धन की सच्ची शोभा उसके सही उपयोग से होती है। अगर धन का सही तरीके से उपयोग ना हो, तो व्यक्ति धनी होते हुए भी गरीब जैसा महसूस करता है।चाणक्य नीति में धन की शोभा आचार्य चाणक्य ने कहा है:गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्।सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥ इसका अर्थ है कि गुण रूप की शोभा बढ़ाते हैं, अच्छा आचरण कुल की शोभा बढ़ाता है, सफलता विद्या को शोभित करती है और धन का सही उपभोग ही धन को शोभित करता है। चाणक्य कहते हैं कि सिर्फ धन रखना काफी नहीं, उसे सही काम में लगाना जरूरी है।धनवान होकर भी कंगाल क्यों माने जाते हैं? आचार्य चाणक्य कहते हैं:निर्गुणस्य हतं रूपं दुःशीलस्य हत...