नई दिल्ली, मई 31 -- 31 मई 2026 का सुविचार हमें याद दिलाता है कि जीवन की हर परेशानी का समाधान बाहर नहीं, बल्कि अपने अंदर छिपा होता है। सही आदतें अपनाकर हम दुख, भय और दरिद्रता जैसे बड़े संकटों को भी दूर कर सकते हैं। चाणक्य नीति में एक श्लोक है:दारिद्र्यनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्।अज्ञाननाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी।। अर्थ: दान देने से दरिद्रता नष्ट होती है, अच्छे आचरण (शील) से दुर्गति मिटती है, प्रज्ञा (विवेक और ज्ञान) से अज्ञान का नाश होता है और सच्ची भावना (भक्ति व सकारात्मक सोच) से भय दूर होता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इन चार आदतों को अपनाकर इंसान जीवन की सभी समस्याओं से मुक्त हो सकता है। आइए इन चार आदतों को विस्तार से समझते हैं।दान से दरिद्रता का नाश चाणक्य के अनुसार, दान सिर्फ धर्म नहीं, बल्कि दरिद्रता दूर करने का सबसे प्रभावी उप...