नई दिल्ली, जून 22 -- सच्ची तरक्की उन लोगों को मिलती है, जो अपनी आदतों पर नियंत्रण रखते हैं। क्रोध, अति उत्साह, चापलूसी और अहंकार जैसे भाव मनुष्य को अंदर से कमजोर कर देते हैं। 22 जून 2026 की सुबह का सुविचार हमें बता रहा है कि इन आदतों को पहचाने और इनसे दूरी बना लें, ताकि जीवन में सफलता की राह साफ और मजबूत हो सके। आचार्य चाणक्य के समकालीन महात्मा विदुर ने महाभारत काल में ऐसी कई नीतियां बताईं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने मानव जीवन को प्रभावित करने वाले चार भावों का जिक्र किया है, जो व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देते हैं। विदुर नीति में एक श्लोक है:क्रोधो हर्षश्च दर्पश्च ह्रीः स्तम्भो मान्यमानिता।यमर्थान्नपकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते।। इसका अर्थ है कि क्रोध, अत्यधिक हर्ष, घमंड और चापलूसी जैसे भाव जो मनुष्य को उसके पुरुषार्थ से दूर ले ज...