नई दिल्ली, मार्च 18 -- आचार्य चाणक्य की नीति आज भी जीवन के हर क्षेत्र में प्रासंगिक है। उन्होंने शत्रु से निपटने की ऐसी रणनीति बताई है, जो बुद्धिमत्ता, धैर्य और दूरदर्शिता पर आधारित है। बाल्यकाल में कुश घास चुभने पर उन्होंने जड़ तक नष्ट करने की बात कही थी, जिससे उनकी शत्रु-नाश की सोच स्पष्ट होती है। चाणक्य नीति में दुश्मन को हराने या नियंत्रित करने के लिए कई सूत्र दिए गए हैं। आइए जानते हैं इनमें से प्रमुख सलाहें।चाणक्य की बाल्यकाल की शिक्षा एक बार बालक चाणक्य के पैर में कुश घास चुभ गई। वे उसे पैरों से कुचल रहे थे। एक आचार्य ने पूछा कि पवित्र कुश पर गुस्सा क्यों? चाणक्य ने उत्तर दिया, 'मैं शत्रु को निर्मूल करने में विश्वास रखता हूं।' उन्होंने कुश की जड़ में माठा डालकर उसे जला दिया। यह घटना दर्शाती है कि चाणक्य शत्रु को आधा-अधूरा नहीं छोड़त...
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