नई दिल्ली, मार्च 29 -- आज का सुविचार 29 मार्च 2026: विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्र गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्र धर्मो मित्रं मृतस्य।। (विद्या प्रवास में मित्र है, पत्नी घर में मित्र है, औषधि रोगी के लिए मित्र है और धर्म मृत्यु के बाद भी मित्र है।) आचार्य चाणक्य अपनी नीति में मनुष्य के सच्चे मित्रों की गिनती बड़े ही सूक्ष्म और व्यावहारिक ढंग से करते हैं। उनके अनुसार, सच्चा मित्र वह नहीं जो केवल सुख के दिनों में साथ दे, बल्कि जो विपत्ति, यात्रा, घरेलू जीवन, बीमारी और मृत्यु के बाद भी साथ निभाए। चाणक्य नीति के इस श्लोक में उन्होंने चार ऐसे परम मित्रों का वर्णन किया है, जो जीवन के हर पड़ाव पर मनुष्य का साथ देते हैं।विद्या - प्रवास का सबसे अच्छा साथी आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान और शिक्षा प्रवास (यात्रा) में सबसे अच्छा मित्र हैं। जब...