नई दिल्ली, दिसम्बर 29 -- पुत्रदा एकादशी का सभी पुराणों में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। ऐसा कहा गया है कि इस तिथि से बढ़कर कोई तिथि नहीं है। भगवान विष्णु को यह तिथि बहुत पसंद है। ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत को करता है, वो श्रीहरि की कृपा पाता है। पद्मपुराण से लेकर नारदपुराण तक में पौष पुत्रदा एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि पुत्रदा एकादशी का जो व्रत रखते हैं, उन्हें संतान की प्राप्ति होती है, जिन लोगों को संतान है, उनके संतान के दुख दूर होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो इस एकादशी का व्रत करता है, उसके वंश में निरंतर वृद्धि होती है।इस महीने में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। इस एकाइसे क्यों कहते हैं वैकुंठ एकादशी सनातन धर्म में पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन बैकुंठ एकादशी भी कहा जाता ...
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