पूर्णिया, सितम्बर 14 -- Purnia News: जलालगढ़, एक संवाददाता। महर्षि मेंही वेदांत आश्रम में आयोजित प्रवचन में महर्षि मेंही के शिष्य स्वामी गणेशानंद बाबा ने कहा कि संसार के काम करते हुए भी भजन किया जा सकता है। मानव जीवन केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि भजन, परमार्थ और आत्मकल्याण के लिए मिला है। उन्होंने कहा कि शरीर में जीवात्मा का निवास होने के कारण शरीर जीवंत प्रतीत होता है। शरीर जड़ है, जबकि जीवात्मा चेतन और अविनाशी है। शरीर के साथ जीवन की अवधि सीमित है, लेकिन जीवात्मा का अस्तित्व अनंत है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में भजन और साधना के लिए समय निकालना चाहिए। यह शरीर साधना का घर और मोक्ष का द्वार है। गणेशानंद बाबा ने कहा कि परमार्थ का मूल उद्देश्य केवल अपने उद्धार की चिंत...