नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- Premanand Maharaj Latest Pravachan: वसनातन धर्म में बड़ों का पैर छूना सम्मान और संस्कार से जोड़कर देखा जाता है। दरअसल जब कोई अपनी उम्र से बड़े व्यक्ति के पैर छूता है तो माना जाता है कि सामने वाला अनुभव में बड़ा है और जिंदगी के कई पहर देख डाले हैं। साथ ही उनके पास ऐसे अनुभव और ज्ञान हैं जिससे उनका सम्मान करना जरूरी है। ऐसे में सामने वाले के पैर छूकर उनके प्रति सम्मान को जताया जाता है और साथ ही उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कई लोग अपने यहां इन चीजों को करने से कतराते हैं। या फिर कुछ लोग ये कहकर पैर नहीं छूने देते हैं कि क्यों हमें पाप का भागीदारी बना रहे हो बेटा? अब वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है।पैर छुआना सही या गलत? हाल ही में प्रेमानंद महाराज के एक प्रवचन के दौरान एक शख्स ने ...