नई दिल्ली, मई 18 -- पूजा-पाठ करते समय मन का भटकना एक आम समस्या है। कई साधक रोज पूजा करते हैं, लेकिन बीच-बीच में मन सांसारिक विचारों में चला जाता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या ऐसी पूजा व्यर्थ चली जाती है? राधा रानी के परम भक्त और वृंदावन के मशहूर संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, भगवान के प्रति किया गया कोई भी प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता हौ। भले ही मन पूरी तरह एकाग्र ना हो, लेकिन नित्य पूजा का अपना अलग महत्व है।मन का भटकना सामान्य है मन का चंचल होना उसका स्वभाव है। प्रेमानंद जी महाराज इसे बहुत सहजता से लेने की सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि मन भटकेगा ही, क्योंकि यह उसकी प्रकृति है। जब आप इसे प्रभु में लगाने की कोशिश करते हैं, तो यह और ज्यादा भटकता है। आपका भटकते मन को बार-बार भगवान की ओर लाना ही साधना है। यह दिखाता है कि आप ईश्वर ...