हिन्दुस्तान ब्यूरो, जून 30 -- पीएचडी कराने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन साल से कम समय बचा है, वे नए शोधार्थियों को शोध नहीं करा सकेंगे। यही नहीं एक प्रोफेसर अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार शोधार्थियों का ही मार्गदर्शन कर सकेंगे। विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई अब नये प्रावधानों से ही होगी। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम-2026 में प्रवेश, शोध, मूल्यांकन और डिग्री प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया को नये सिरे से निर्धारित किया गया है। पीएचडी शोधार्थियों को सप्ताह में चार से छह घंटे तक शिक्षण या रिसर्च असिस्टेंटशिप का कार्य भी सौंपा जा सकेगा। पीएचडी में प्रवेश केवल यूजीसी-नेट, यूजीसी-सीएसआइआर, नेट और गेट उत्तीर्ण अभ्यर्थिय...