पाकुड़, सितम्बर 11 -- Pakur News: शहर और आसपास के इलाकों में विकास के दावे भले ही तमाम किए जा रहे हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत कई जगह अब भी इन दावों की पोल खोलती नज़र आती है। बात अगर मध्य विद्यालय कूड़ापाड़ा की करें, तो यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि एक दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यहां के नौनिहाल और स्थानीय ग्रामीण बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में स्थिति बद से बदतर हो जाती है।

स्कूली बच्चों की स्थिति स्कूली बच्चों को कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से गुजरकर अपने स्कूल तक पहुंचना पड़ता है। स्कूल के ठीक सामने फेंके जाने वाले कचरे से उठने वाली दुर्गंध ने बच्चों और स्थानीय रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। इसी दूषित माहौल और बदहाल रास्ते से होकर बच्चों और मोहल्लेवासियों को पूरा दिन बिताना पड़ता है। एक तरफ प्रशासन द्व...