उरई, अगस्त 6 -- Orai News: कालपी, संवाददाता। कभी देश-विदेश के बाजारों में अपनी अलग पहचान रखने वाला कालपी का हाथ से बुना कालीन उद्योग अब सरकारी प्रोत्साहन के अभाव और अंतरराष्ट्रीय हालात की मार से अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, निर्यात में कमी और स्थानीय सुविधाओं के अभाव ने इस परंपरागत उद्योग को कमजोर कर दिया है। इसका सीधा असर बुनकरों और कालीन कारोबार से जुड़े परिवारों की आजीविका पर पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों से दरी कालीन उद्योग से जुड़े कालपी के हाजी एहसान अंसारी ने बताते हैं कि वर्ष 1980 के दशक में ग्वालियर से आए कारीगरों ने कालपी के लोगों को हाथ से कालीन बुनने का प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस व्यवसाय से जुड़े और कालपी में तैयार होने वाले कालीन की मांग ग्वालियर, आगरा, दिल्ली, मुंबई और ज...