उरई, अक्टूबर 6 -- Orai News: जालौन। संवाददाता व्यक्ति का बचपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है, उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी न हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। यह बात चौधरयाना स्थित गुप्ता भवन पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक डॉ. शिवसंपत द्विवेदी ने कही।उन्होंने कहा कि राजा उत्तानपाद के वंश में ध्रुव हुए हैं। सौतेली मां सुरुचि द्वारा अपमानित होने पर भी उनकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य और संयम की नितांत आवश्यकता है। यह भी पढ़ें- Orai News: श्रीमद्भागवत केवल ग्रंथ नहीं, जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान : डॉ. शिव संपत द्विवेदी भक्ति की प्रेरणा बचपन में ही देनी चाहिए। कथा वाचक ने ...