उरई, अगस्त 12 -- Orai News: कालपी। संवाददाता अगर सब कुछ ठीक रहा तो ऐतिहासिक पीलाघाट की हालत सुधर सकती है। मंगलवार को सिंचाई विभाग की टीम ने घाट का निरीक्षण कर उसे नया स्वरूप देने की संभावना तलाशी।कालपी यमुना घाटों और मराठाकालीन विरासतों के कारण धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध रहा है, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते इसकी पहचान मिटने की कगार पर है। गत वर्षों में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने यमुना की कटान से कगार और कोषागार को बचाने के लिए पत्थर की दीवाल बनवाई थी, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। किलाघाट को छोड़ दें तो यमुना तट स्थित बाई घाट और ढोडेश्वर घाट का अस्तित्व खत्म हो चुका है। अब पीलाघाट भी संकट में है। क्षेत्रीय विधायक विनोद चतुर्वेदी की पहल पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता धर्मघोष, सहायक अभियन्ता वसीम रजा, अवर अभियन्ता आशीष व...