गुवाहाटी, मार्च 18 -- असम विधानसभा चुनाव से ठीक तीन हफ्ते पहले नागांव संसदीय सीट से कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने हाथ (कांग्रेस) का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने एक तरफ जहां असम कांग्रेस के अंदर की अंतर्कलह को उजागर कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में कांग्रेस संगठन की कमजोर होती पकड़ और नेतृत्व संकट को भी सामने ला दिया है। चुनावों से ठीक पहले का यह घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि बोरदोलोई, विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष थे। ऐसे में अचानक उनका इस्तीफा संगठनात्मक एकता और अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।पूर्वोत्तर के शशि थरूर क्यों? बता दें कि प्रद्युत बोरदोलोई को अक्सर उनके बौद्धिक दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ, वाकपटुत...
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