मुजफ्फरपुर, सितम्बर 6 -- Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। साहित्य के लिए सबके मन में उतनी ही जगह होती है जितनी अपनी मां के लिए। परिस्थितियां जीवन में बदल जाती हैं। कई बार परिस्थिति ऐसी होती है कि चाहते हुए भी जिस तरह मां-बाप की छांव में बच्चे नहीं बैठ पाते, उसी तरह साहित्य की चाह रखते हुए भी आज के युवा बेरोजगारी समेत अन्य कारणों से इससे नहीं जुड़ पाते हैं। मगर प्यास रहती है कि साहित्य से जुड़ा जाए। शनिवार को शहर पहुंची साहित्य अकादमी से सम्मानित डॉ. अनामिका ने文学 में बदलाव, शहर में साहित्य का माहौल, युवाओं को इससे जोड़ने ये लेकर कई मुद्दों पर हिन्दुस्तान से बात की।

आज का युवा उन्होंने कहा कि आज के युवा कई तरह की अनिश्चितता और सकंट से गुजर रहे हैं। स्थाई रोजगार ही नहीं, संबंध भी उनके पास स्थाई नहीं है। ऐसे में साहित्य से जुड...