मुंगेर, अगस्त 29 -- Munger News: मुंगेर, हिन्दुस्तान प्रतिनिध। शुक्रवार को संन्यास पीठ के पादुका दर्शन परिसर में चातुर्मास के दौरान आयोजित तीन दिवसीय कृष्ण आराधना कार्यक्रम के अंतिम दिन परमंहस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि, कृष्णभक्ति केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन को प्रेम, समर्पण और संतुलन से भरने की साधना है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम मनुष्य को जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने और उनके बीच संतुलित बने रहने की प्रेरणा देता है। कृष्ण के झूले को इसी आध्यात्मिक भाव का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि, झूले की आगे-पीछे होती गति मनुष्य जीवन के सुख-दुःख, सफलता-असफलता और निरंतर बदलती परिस्थितियों का बिंब है। उसका चक्रीय आवागमन जीवन के निरंतर प्रवाह की ओर संकेत करता है। भक्त जब भगवान को झूला झुलाता है तो मानो अपने जीवन की डोर उन...