मुरादाबाद, अक्टूबर 10 -- Moradabad News: मुरादाबाद। जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा हैं यारों, यह मैं नहीं कहता...। कहने को तो यह एक फिल्मी गीत है। मगर शहर की ह्मूमन वेलफेयर एसोसिएशन और कमेटी खिदमते खलक साकार कर रही है। यह हर वर्ष लावारिस मिले शवों का उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कराती है और पितृ विजर्सन के दिन उनकी अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर उनका भी कोई अपना है ऐसा एहसास कराती है। इन दोनों संस्थाओं को इस वर्ष 257 ऐसे शव मिले जिनसे मुंह मोड़ कर अपनों से'लावारिस' नाम दे दिया। अंतिम विदाई के समय चार गंधों का सहारा न देकर किनारा कर लिया। यह भी पढ़ें- Hapur News: श्रद्धालु छोड़ गए गंदगी का अंबार मुखाग्नि देने के जगह नजरें रिश्तों की कमान ही तोड़ दी। संस्था के अध्यक्ष अजय भंडूला एवं राशिद सिद्दीकी ने बताया इस वर्ष उन्हें 257 ऐसे शव मिले...