मुरादाबाद, जुलाई 23 -- Moradabad News: जयंती पुर स्थित श्रीजी मिलन धर्मशाला में श्रीमद् भावगत कथा आरंभ हुई। इसमें कथा व्यास कविचंद्र दास ने बताया कि महाराज परीक्षित ने कलियुग को रहने के लिए चार स्थान दिये थे। उन्होंने कहा कि जहां मांसाहार हो, जहां शराब पी जाती हो, जहां जुआ खेला जाता है और जहां नाजायज संबंध बनाए जाते हों वहां आप वास कर सकते हैं। तब कलियुग ने कहा जैसी आपने मेरी बुरी सूरत देखी वैसे ही बुरे स्थान मुझे रहने के लिए दे दिये। यह स्थान तो आपके राज्य में मिलेंगे ही नहीं। कोई स्थान ऐसा दीजिये जिसका अस्तित्व हो। तब परीक्षित ने उन्हें पांचवां स्थान स्वर्ण दिया। स्वर्ण में कलियुग का वास माना जाता है। मगर गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है किधातुओं में स्वर्ण उनका स्वरूप है। तब क्या माना जाए। इस बारे में संतों ने कहा अनीतिपूर्वक कमाये गए धन...